विकासखण्ड शिवगढ़ जनपद प्रतापगढ़ (उ.प्र.) में जनसंख्या की गत्यात्मकता
निहारिका सोनकर1, डाॅ. प्रमोद कुमार तिवारी2
1शोध छात्रा (नेट), भूगोल विभाग, नागरिक पी.जी. कालेज, जंघई, जौनपुर, उत्तर प्रदेश।
2प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, नागरिक पी.जी. कालेज, जंघई, जौनपुर, उत्तर प्रदेश।
*Corresponding Author E-mail: sonkarniharika@gmail.com
सारांष
प्रस्तुत शोध पत्र अध्ययन क्षेत्र विकासखण्ड शिवगढ़ की जनसंख्या का स्थानिक कालिक विश्लेषण रूप में प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन क्षेत्र प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) के रानीगंज तहसील का एक विकासखण्ड है जिसका कुल क्षेत्रफल 129.71 वर्ग किमी. है। प्रस्तुत शोध प्रबंध में विकासखण्ड शिवगढ़ की कुल जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व, साक्षरता, लिंगानुपात एवं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति जनसंख्या तथा प्रतिशत एवं समस्याओं का विस्तृत अध्ययन करने का प्रयास किया गया है। गत् दशक की जनगणना से जनसंख्या का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। 2011 की जनगणना के अनुसार विकासखण्ड शिवगढ़ की कुल जनसंख्या 142650 है।
eq[; 'kCn % जनसंख्या, ग्रामीण विकास, जनसंख्या वृद्धि आकलन, जनसंख्या घनत्व, समस्याएँ, संसाधन।
प्रस्तावना
जनसंख्या किसी देश का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है जिससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग संभव हो पाता है बल्कि कुशल, प्रशिक्षित और मेहनती श्रम शक्ति द्वारा आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। जनसंख्या का आशय जन की संख्या, उसकी आयु, लिंग जाति, धर्म, साक्षरता, जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति, घनत्व, व्यवसाय तथा ग्रामीण एवं नगरीय अनुपात आदि से है। किसी भी स्थान की जनसंख्या वृद्धि का तात्पर्य एक क्षेत्र विशेष में रह रहे लोगों की संख्या में परिवर्तन से है।
कभी-कभी जनसंख्या वृद्धि अर्थात् लोगों की संख्या में परिवर्तन संसाधन और विकास के रूप में प्रस्तुत होता है तो कभी-कभी यह एक अहम समस्या का रूप धारण कर लेती है। जनसंख्या वृद्धि के आंकलन से किसी भी क्षेत्र विशेष के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक पर्यावरण के तथ्यों को समझने, जानने में सहयोग मिलता है। वहीं क्षेत्र की समस्याओं को आसानी से इंगित करके समस्याओं का नियोजन करना सरल हो जाता है।
जनसंख्या और संसाधन सम्बन्ध पर विचार सर्वप्रथम प्लेटों से प्रारम्भ हुआ किन्तु इस पर व्यवस्थित विचार राबर्ट माल्थस ने दिया जिसे माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत कहा गया। प्राकृतिक आधार पर आधारित जनसंख्या सिद्धांत का प्रथम प्रतिपादक माल्थस था तथा सामाजिक नियमों पर आधारित जनसंख्या सिद्धांत का प्रतिपादन करने वालों में हेनरी जार्ज, कार्ल माक्र्स आदि है। गुप्ता (1982) जनसंख्या वृद्धि का अध्ययन किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, ऐतिहासिक घटनाएँ एवं राजनैतिक भूदृश्य को समझने के लिए नितान्त आवश्यक है कि जनसंख्या किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास, सामाजिक स्तर, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि एवं राजनैतिक विचारधाराओं के सूचकांक के रूप में प्रस्तुत होती है।
अध्ययन उद्देश्य
1ण् विकासखण्ड शिवगढ़ में जनसंख्या का आंकलन करना।
2ण् विकासखण्ड शिवगढ़ में जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को ज्ञात करना।
3ण् जनसंख्या को ग्रामीण विकास में संसाधन के रूप में लोगों तक सुझाव प्रस्तुत करना।
आंकड़ों का स्रोत एवं विधि तंत्र:
प्रस्तुत शोध पत्र विकासखण्ड शिवगढ़ के आंकड़े द्वितीयक रूप से संग्रहित किये गये है। आंकड़ों को एकत्रीकरण हेतु 2011 को आधार मानकर किया गया है। यह शोध प्रबन्ध मुख्यतः द्वितीयक आंकड़ों पर आधारित है। द्वितीयक आंकड़ों की प्राप्ति मासिक पत्रिका, समाजार्थिक समीक्षा विकासखण्ड शिवगढ़, सांख्यिकी पत्रिका, विकासखण्ड शिवगढ़ जनपद जनगणना हस्त पुस्तिका, जनपद गजेटियर से होगी। इन आंकड़ों को एम.एस. एक्सेल, एम.एस. वर्ड साॅफ्टवेयर के माध्यम से तालिकाबद्ध किया जायेगा। सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग करके आंकड़ों का विश्लेषण किया जायेगा साथ ही साथ मानचित्र का प्रयोग भी किया जायेगा।
अध्ययन क्षेत्र
प्रस्तुत शोध पत्र जनपद प्रतापगढ़ इलाहाबाद मण्डल के उत्तरी भाग में स्थित है। वर्तमान समय में इस जनपद प्रतापगढ़ में कुल 17 विकासखण्ड है जिसमें विकासखण्ड शिवगढ़ शोध अध्ययन क्षेत्र है। विकासखण्ड शिवगढ़ जनपद प्रतापगढ़ के दक्षिण पूर्वी भाग में स्थित हैं जनपद मुख्यालय से विकासखण्ड शिवगढ़ मुख्यालय की दूरी 27 किलोमीटर है। विकासखण्ड शिवगढ़ का भौगोलिक क्षेत्रफल 129.71 वर्ग किमी. हेक्टेयर है जो जनपद प्रतापगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र का 3.5 प्रतिशत है। विकासखण्ड शिवगढ़ की कुल जनसंख्या 142650 है जिसमें 71002 पुरूष तथा 71648 स्त्रियाँ हैं। विकासखण्ड शिवगढ़ में साक्षर व्यक्तियों की संख्या 100744 जिसमें पुरूष 57841 एवं 42903 महिलाएँ हैं अर्थात् कुल साक्षरता 73.39 प्रतिशत है। जनसंख्या घनत्व 1227.00 प्रतिवर्ग किमी. है। अनुसूचित जाति 26671 तथा अनुसूचित जनजाति .5 है। कुल 133 आबाद ग्रामों में से 129 ग्रामों में पक्की सड़के निर्मित है। अर्थात् 96.99 प्रतिशत ग्राम, पक्की सड़कों से युक्त है। इस विकासखण्ड में प्रति लाख जनसख्ंया पर कुल पक्की सड़कों की लम्बाई 191.7 किमी. है जबकि प्रतिलाख जनसख्ंया पर लोकनिर्माण विभाग द्वारा संघृत पक्की सड़कों की लम्बाई 165.3 किमी. है। अतः विकासखण्ड शिवगढ़ में यातायात साधन का ग्रामीण विकास में उचित प्रयोग पूर्णतयः सम्भव है। विकास खण्ड शिवगढ़ में रेलवे लाईन हैं जिसका निकटतम् रेलवे स्टेशन दादूपुर है जो 6 किमी. की दूरी पर है। इससे भी सतत् विकास की सम्भावना दृष्टिगोचर प्रतीत होती है। विकासखण्ड में एक मात्र नदी सई है जो पूर्णतयः प्रदूषित हो चुकी है इसका जल सिंचाई योग ही है। विकासखण्ड का अत्यधिक भाग समतल व उपजाऊ है। यहाँ दोमट व मटियारी किसम्ी की मिट्टी पायी जाती है। उपरोक्त अध्ययन क्षेत्र विकासखण्ड शिवगढ़ में जनसंख्या तथा उसके द्वारा प्राकृति सामाजिक संसाधन को बस सही रूप व आकार और नियोजन की आवश्यकता है। जिसमें विकासखण्ड शिवगढ़ में रहने वाले लोगों परिवारों की आर्थिक स्थिति व दैनिक दिनचर्या में सुधार के साथ जीवन स्तर में सुधार सम्भव है।
जनसंख्या वृद्धि का क्षेत्रीय प्रतिरूप
जनसंख्या वितरण सम्बन्धी विस्तृत समीक्षा:
जनसंख्या वितरण प्रतिरूप के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि मानव समाज में किस तक भौतिक पर्यावरण से समायोजन किया है। जनसंख्या घनत्व संकल्पना मनुष्य के क्षेत्रीय वितरण प्रारूप को स्पष्ट करने का एक महत्वपूर्ण बिन्दु है। कुल जनसंख्या घनत्व 1099.76, डेक्मो जी. जे. (1970) के अनुसार मानव एवं भूमि के मध्य अनुपात जो किसी क्षेत्र के प्रमुख तत्व हैं, जनसंख्या अध्ययन के मूल बिन्दु होते हैं। वर्ष 2011 के जनगणना के अनुसार विकासखण्ड शिवगढ़ की जनसंख्या 142650 है जिसमें पुरूष 71002 और 71648 स्त्रियाँ हैं। वर्ष 2011 की दस वर्ष की अवधि में विकासखण्ड की जनसंख्या में कुल 18.47 प्रतिशत वृद्धि हुई है। पुरूषों की जनसंख्या में 20.04 प्रतिशत, 16.95 प्रतिशत स्त्रियों की जनसंख्या में वृद्धि हुई है। पुरूषों की जनसंख्या वृद्धि स्त्रियों की जनसंख्या वृद्धि की अपेक्षा अधिक है। विकासखण्ड के अन्तर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति की जनसंख्या 18 प्रतिशत है।
कर्मकारों का विवरण
जनगणना 2011 के अनुसार कर्मकारों की संख्या 43570 है। पुरूष कर्मकार 22312, सीमान्त कर्मकार 21258 है। कुल कृषि श्रमिक 4327 तथा 5921 कृषक। पारिवारिक उद्योग में लगे कर्मकार 3032 है। अन्य गतिविधि में संलग्न कर्मकारों की संख्या 2769 है।
साक्षरता
साक्षरता मानव विकास और जीवन की गुणवत्ता का एक सूचकांक है। कम साक्षरता से आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक विकास में रूकावट आती है। सन् 2011 जनगणना के अनुसार निम्नवत् है-
वर्ष 2011 की जनसंख्या के अनुसार साक्षरता सम्बन्धी सूचनाएँ निम्नवत् हैंः
महिलाओं की साक्षरता दर पुरूषों की तुलना में कम है।
निष्कर्ष
विकासखण्ड शिवगढ़ में जनसंख्या संसाधन के अन्तर्गत विकास एवं वृद्धि तो है किन्तु अभी व्यवस्थित व नियोजित विकास का ज्ञान लोगों में नहीं है। साक्षरता अच्छी है किन्तु उसका उचित प्रयोग देखने को नहीं मिल रहा। यातायात और तकनीक का कहीं आशावादी प्रयोग नहीं दिखता, जल व्यवस्था में कमी है। योजनाओं का उचित ढंग से या प्रशिक्षण के द्वारा ही क्रियान्वयन हो सकता है। लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है तभी विकासखण्ड शिवगढ़ पूर्ण रूप से सतत् विकास कर पायेगा।
संदर्भ सूची
1. डाॅ. तिवारी सी.आर., (2018), मौर्या एस.डी. जनसंख्या भूगोल (2011)
2. संजय सिंह क्रानिकल
3. मासिक पत्रिका कुरूक्षेत्र योजना।
4. सांख्यिकी पत्रिका विकासखण्ड, शिवगढ़।
5. समाजार्थिक पत्रिका/समीक्षा विकासखण्ड शिवगढ़ (2019)
6. समाजार्थिक समीक्षा पत्रिका जनपद प्रतापगढ़ (उ.प्र.) वर्ष 2019
7. सांख्यिकी पत्रिका जनपद प्रतापगढ़ (उ.प्र.) वर्ष 2019
8. अन्य पत्रिकाएँ।
9. भूतल दिग्दर्शन Earth Surface Revi भौगोलिक विकास शोध संस्थान गोरखपुर
10. District Census Handbook Pratapgarh.
Received on 06.03.2021 Modified on 19.03.2021
Accepted on 27.03.2021 © A&V Publications All right reserved
Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2021; 9(1):41-44.